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गवर्नमेंट कॉलेज फॉर गर्ल्स में क्राइम अगेंस्ट वुमन पर
गवर्नमेंट कॉलेज फॉर गर्ल्स में क्राइम अगेंस्ट वुमन पर सेमिनार में छलका छात्राओं का दर्द


LUDHIANA- कॉलेज के बाहर मनचले तरह-तरह के कमेंट करते हैं। यहां तक कि ऑटो में बैठते हैं तो हर कोई छूने का मौका तलाशता है। मनचलों की गंदी निगाहें हमारी तरफ होती है। गवर्नमेंट कॉलेज फॉर गर्ल्स (जीसीजी) में शुक्रवार को क्राइम अगेंस्ट वुमन पर कराए सेमिनार के दौरान छात्राओं का दर्द छलका। उन्होंने पहली बार अपनी बात खुलकर एसीपी सरताज सिंह चाहल के सामने रखी। उन्होंने यहां तक कहा कि हम अपनी सुरक्षा तो कर सकते हैं और कई बार सामने से जवाब भी दिया है, लेकिन डर भी लगता है कि कहीं कोई हमारे पीछे न पड़ जाए। तब पुलिस की कमी महसूस होती है, क्योंकि जिन जगहों पर हमें पुलिस की जरूरत होती है, वहां होती नहीं, लिहाजा हम शिकायत नहीं कर पाते। इस कारण ऐसे लोगों के हौसले बुलंद हो चुके हैं। यह सुनकर एसीपी ने इसका हल और कॉलेज के बाहर महिला पुलिस तैनात करने का आश्वासन दिया।

सेमिनार की शुरुआत में एसीपी सरताज सिंह ने कहा कि उन्हें पता है कि कॉलेज स्टूडेंट्स को दिक्कत का सामना करना पड़ता है, लेकिन वे उनके मुंह से सुनना चाहते हैं। इसके बाद बीए स्टूडेंट अमनदीप कौर खड़ी हुईं। उन्होंने कहा कि वह जब कभी घर से कॉलेज आती है तो अकसर ऑटो में बैठने और उतरने के बाद लोग छूने की कोशिश करते हैं। ऐसा रोज नहीं होता, लेकिन कभी-कभार इस स्थिति का सामना करना पड़ता है। वहीं, स्टूडेंट निधि ने बताया कि कॉलेज के बाहर अकसर मनचले खड़े रहते हैं, जो आती-जाती लड़कियों पर कमेंट पास करते हैं। ज्यादातर लड़कियां इग्नोर कर निकल जाती हैं, लेकिन कई बार तो भद्दी भाषा का इस्तेमाल किया जाता है। यह सुनकर कॉलेज प्रिंसिपल सविता शर्मा और बाकी टीचर्स ने कहा कि पहले कॉलेज के बाहर महिला पुलिस खड़ी रहती थी तो कॉलेज के बाहर छुट्टी के बाहर कोई मनचला फटकता भी नहीं था, लेकिन पिछले कई माह से पुलिस आनी बंद हो गई। इसके चलते मनचले खड़े नजर आते हैं। वहीं, एक छात्रा ने एसीपी से कहा कि यहां बैठी हर लड़की को कोई न कोई परेशानी जरूर है, लेकिन वह खुलकर नहीं बोल सकती। लिहाजा आपको चाहिए कि छात्राओं से अलग में चर्चा करें, ताकि वो खुलकर परेशानी बता सकें।

समस्याएं सुनने के बाद एसीपी ने कहा कि ये सेमिनार वह सभी कॉलेजों में करवा रहे हैं, ताकि छात्राओं की परेशानी का पता चले। इसके अलावा हर कॉलेज में हिम्मत की आवाज नाम से कंप्लेंट बॉक्स लगाया जा रहा। इसमें छात्राएं अपनी शिकायतें डाल सकती हैं। चाहे अपना नाम लिखें या न, उस पर एक्शन लिया जाएगा। शुरुआत में बॉक्स लगाने के तीन दिन में इसे चेक किया जाएगा कि क्या शिकायतें आ रही हैं। इसके बाद इसे महीना दर महीना चेक कर परेशानी हल करेंगे
(UPDATED ON FEBRUARY 8TH, 2019)
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