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चार वर्षीय बीएड के आवेदन पर रोक, दो साल यथावत
बिलासपुर-सत्र 2019-23 के लिए शुरू होने वाली चार वर्षीय बीएड व डीएलईडी पाठ्यक्रम पर आगामी आदेश तक रोक लगा दी गई है। दो वर्षीय डिग्री व डिप्लोमा पाठ्यक्रम फिलहाल यथावत रहेंगे। इधर नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) ने प्रस्तावित इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम को अपने ऑनलाइन पोर्टल से हटा दिया है।

अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय से संबद्ध बीएड व डीएलईडी पाठ्यक्रम संचालित 44 कॉलेजों में भी ऑनलाइन प्रक्रिया नहीं अपना सकेंगे। शिक्षा महाविद्यालय के प्राध्यापकों का कहना है कि देशभर में हुए विरोध के कारण एनसीटीई ने यह कदम उठाया है। पोर्टल से प्रोग्राम हटाने के साथ विशेष तौर पर एक पट्टी भी अपडेट की गई है, जिसे अलग से हाईलाइट भी किया गया है। इसके बाद अब आगामी आदेश तक कोई भी संस्थान चार वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि यदि भविष्य में मानव संस्थान मंत्रालय पुनः आवेदन मांगता है, तो शिक्षा महाविद्यालयों के साथ-साथ कोई भी अन्य संस्थान इसके लिए आवेदन कर सकेगा। एनसीटीई ने कु छ समय पहले स्नातकोत्तर के साथ-साथ बीएड की डिग्री देने का चार वर्षीय कोर्स शुरू करने की घोषणा की थी। इसके तहत नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर एजुकेशन ने तीन दिसंबर से 31 दिसंबर तक इच्छुक संस्थानों से ऑनलाइन आवेदन मांगे थे।


डीएलएड की संबद्घता राज्य सरकार के शिक्षा विभाग और बीएड की संबद्घता संबंधित विश्वविद्यालय से मिलती थी, लेकिन इन दोनों पाठ्यक्रमों की संबद्घता सीधे विश्वविद्यालय से मिलेगी और मान्यता एनसीटीई के हाथ में थी। कोर्स में एडमिशन एंट्रेंस टेस्ट या फिर मेरिट के आधार पर होगा, इस बात का फैसला संबंधित राज्य सरकारों को करना था। जारी अधिसूचना के मुताबिक आइटीईपी के लिए एक यूनिट 50 सीटों की तय की गई थी। बीएड-एमएड वाले संस्थान को इस कोर्स के लिए 500 वर्ग मीटर भूमि और 400 वर्ग मीटर बिल्डिंग तैयार करनी होगी। किसी नए संस्थान को यह कोर्स संचालित करने के लिए बीए, बीएससी, बीकॉम जैसे कोर्स के साथ यह कोर्स मिलता। इसके लिए उन्हें कम से कम तीन हजार वर्ग मीटर भूमि खरीदनी पड़ती। फिलहाल इस पर कुछ समय के लिए विराम लग गया है।(updated on January 3rd, 2019)


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