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सत्यसाईं स्कूल के एनुअल फंक्शन में मोटिवेशनल स्पीकर
सत्यसाईं स्कूल के एनुअल फंक्शन में मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा ने स्टूडेंट्स से कहा समस्या जीवन का प्रतीक है


INDORE. यूं तो ये एक स्कूल का वार्षिक उत्सव ही था, लेकिन बच्चों, शिक्षकों और संस्थान के विचारकों-पथ प्रदर्शकों ने इसे ज्ञान, कला, प्रतिभा, संस्कारों और संस्कृति का उत्सव बना दिया। आमतौर पर स्कूल्स के एनुअल फंक्शंस से इतर यहां न फिल्मी गीत बजे न ही किड्स रैम्पवॉक हुई। बच्चे ज़िंदगी जीने का सही सलीका सीखें इस उद्देश्य को ही सर्वोपरि रख प्रस्तुतियां रचीं और ऑथर एंड मोटिवेशनल स्पीकर शिवखेड़ा से बच्चों को रूबरू कराया। सत्यसाईं स्कूल का एनुअल फंक्शन रविवार को स्कूल कैम्पस में हुआ। टीचर्स और स्टूडेंट्स फेलिसिटेशन के बाद शिवखेड़ा का वक्तव्य हुआ। पढ़िए क्या कहते हैं शिवखेड़ा, उन्हीं के शब्दों में :

"हम अक्सर समस्याओें से घबराते हैं जबकि शायद ही ऐसा कोई शख्स हो जिसके जीवन में समस्या ना हों। पावर ऑफ पॉज़िटिव थिंकिंग बुक के ऑथर डॉ. नॉर्मन विंसेंट पील ने अपनी स्पीच में एक बार लोगों से पूछा यहां ऐसा कौन है जो किसी ना किसी समस्या से त्रस्त है। सभी ने हाथ खड़े किए तो डॉ. पील ने कहा यहां से महज़ कुछ सौ मीटर एक ऐसी जगह है, जहां कई सारे लोग आराम से सो रहे हैं, उन्हें किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं है। वो जगह शमशान है। क्या अब भी आप चाहते हैं कि आपके जीवन में कोई समस्या ना रहे। दरअसल, समस्याएं जीवन का प्रतीक हैं। आपके जीवन से यदि समस्याएं खत्म हो गईं तो समझिए जीवन ही खत्म हो गया।

पेरेंट्स, टीचर्स और स्टूडेंट्स को समस्याओं का महत्व समझाते हुए उन्होंने बताया कि- अमेरिकन स्विमर माइकल फेल्प्स ने एक ही ओलिम्पिक में आठ गोल्ड मैडल जीते थे। उस इवेंट से दो साल पहले उनके हाथ में फ्रैक्चर हो गया था। डॉक्टर ने उन्हें कहा आप पानी में भी नहीं उतर सकते। यदि तैरेंगे भी तो ओलिम्पिक जैसे कॉम्पीटिशन में जीतना असंभव है। फेल्प्स ने कहा मैं दस सालों से ओलिम्पिक के लिए तैयारी कर रहा हूं, सिर्फ एक फ्रैक्चर की वजह से हार नहीं मानूंगा। उन्होंने हाथों की जगह अपने पैरों को मजबूत किया। दो सालों तक हर दिन आठ घंटे प्रैक्टिस की। सौ मीटर बटरफ्लाय राउंड में वे अपने अपोनेंट से सेकंड के सौंवे हिस्से से जीते थे। ये सब उनकी मेहनत के कारण हुआ। मार्शल आर्ट में दुनिया में श्रेष्ठ माने जाने वाले ब्रूसली का एक पैर दूसरे से एक इंच छोटा था। इस समस्या के कारण साधारण आदमी ठीक से खड़ा भी नहीं हो सकता। उनकी आईसाइट भी कमजोर थी। कई बार वे अपने अपोनेंट को ठीक से देख भी नहीं पाते थे। फिर भी वे हर दिन पांच हज़ार पंचेस की प्रैक्टिस करते थे।

स्कूल की प्रिंसिपल पुनीता नेहरु ने एनुअल रिपोर्ट में बताया कि स्कूल को इस साल नेशनल करिकुलम कैटेगरी में देश के टॉप 50 स्कूलों में शामिल किया गया है। देश के प्रोग्रसिव स्कूल के एनुअल इवैल्युएशन के बाद फॉर्च्यून इंडिया सहित दूसरे इंडस्ट्री पावर हाउसेस द्वारा दिया जाता है। स्कूल को लगातार दूसरे साल स्कूल ऑफ एक्सीलेंस का अवॉर्ड भी मिला है। एनुअल फंक्शन कार्यक्रम में बोर्ड के चेयरमैन रमेश बाहेती सहित बोर्ड मेंबर्स शामिल थे। इनमें दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, सु्प्रीम कोर्ट के वकील विवेक तन्खा, विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष वी.एस. कोकजे, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस आर.सी. लाहोटी मौजूद थे।
(UPDATED ON DECEMBER 2ND, 2018)

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